मंजर देखने…
मंजर देखने आए हो
देख लो एक तरफ़ … से
दिल की दवा ले लेना … कुछ छोड़ना नहीँ …
तुम्हारा ऐसा सस्र हुआ तो कौन सभालेगा
मज़ाक लग रहा था ना ये खेल …
तुम तो अट्टहास कर रहे थे
अब क्या हुआ¿¿¿¿
अब क्यो रो रहा है
ऐं…
अब कौन सी औसधि लाएगा
अपना दर्द कम करने के लिए
ला इधर दे …
ये क्या है????………………………………
यही है तेरे दर्द की दवा
ओह!
ये इसान है मित्र
इनमे ममता है
लगाव है …
तू ये सब नहीँ समझे गा
ये सिर्फ तुझे ही लाभदायक है
तू इनके तरह जीने का प्रयास भी न कर
ये तेरे बस की बात नहीँ
ये ता उम्र दर्द और डर की पोटली सर लिए फिरता है
कभी उफ तक नहीँ करता
कुछ बेवकूफो ने इसे बाँटा
कभी जाति पर
कभी धर्म पर
कभी समाज पर
इसका आज तक शोषण हुआ है
ये कुछ बोला ???
नहीँ ये कभी कुछ नहीँ बोलता
इंसान है ना
बेहद ही मेहनती कर्मठ और दयालु है
ये पलको मे छिपी चीजे
भी बिदा कर देता है
तू कर सकता है
तू क्या समझे गा !!!!!!!
ये सिर्फ़ एक इंसान ही समझ सकता है।
भले इसे तूने बनाया है
पर कभी तेरे दरवाज़े से इसने कुछ माँगा
नहीँ जो कर्मठ है वो कभी तेरे सामने हाथ नहीँ फैलाए गे
वो अपनी माता के सिखाए गुणो पर ही
पूरी जिन्दगी गुज़ार देते है
तेरी तो कोई माँ नहीँ
तू क्या जाने ममता???
तू तो बस
जान लेना जनता है
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