सेहरा…
आज सेहरा पहना है
इससे बड़ा और क्या इन्तेहान दूँ
कुछ पल बाद
कसमे भी खा लूँगा
तेरी खाली माँग भी
सारे समाज के सामने भर दूँगा
शायद हाथ की लकीरे यही चाहती है
खुदा ने वही अपना रिस्ता ते कर दिया है
आ हाथ थाम …
तू मेरा मे तेरा…
देख चँद को
ये हम दोनो के मिलन का साछी है
ये तारे
ये दरख्त
ये हवाए
हम दोनो की हर साँस
हृदय की धड़कन
नब्ज की एक एक चाल
निगाहो की पलॉके
साछी है …
साछी है
ये दिसाए
ये परिन्दे
ये लहलहाते खेत…
मे इनके सामने तुझे अपनाता हूँ
अग्नि साछी है
की हम अब एक है
एक एक कदम पर
अब जुदा नहीँ नहीँ
कोई ग़म नहीँ है
जो तेरा है सब मेरा है
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