न बेटा अपने घर का,न बहुऐ अपने घर की
बिस्मित होती जाती है,
चमचमाते दाँतो की खिड़की
अब घर नहीँ आती,
बहुए अपने घर की…
बहुए अपने घर की,
सास बनी अब घर की
आगाज मचाती है,
नित ख़ुशियों से लड़ती …
अब बहुओं को देते देखा है ,
आसिर्वाद सासुर को
माता करती काम सकल घर
बेटा ससुराल के घर को…
बेटा ससुराल के घर को,
हर दिन दहेज प्रथा की धमकी
बड़ा कठिन है हाल बिंदौरी,
न बेटा अपने घर का ना बहुऐं अपने घर की…
गई राज सास ससुर की
बहू रखे पैर जो चौखट
बहन ,भाई ,माता -पिता से
होती नित है खटपट
होती नित है खटपट
कौन निकाले राह
कुरु छेत्र है आँगन
बहुओं का आगाज…
आमोद बिंदौरी 26/04/15
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