जुगनू
ये जो जलते बुझते जुगनू है...
दिलासा देते हैं ...
ह्रदय को..
और...
ताल ठोकते है
अन्धेरेको ..
कहते है..
हमारा सूरज दुबा है ।हम नहीं..
हम तेरे सामंती राज में भी..
जलते बुझते जिन्दा रहेगे...
तब तक..
जब तक हमारा सूरज
नवजीवन किरण के साथ
पूर्व से....
ओजमय नहीं हो जायेगा....आमोद बिन्दौरी
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