पुरस्कार
पुरस्कार
बड़ा ही अच्छा शब्द है। हर इसन के ह्रदय में इसका नाम सुनते ही ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है।
जो व्यक्ति इसेपाता है ।प्रतिष्ठा को चार चाँद लगते हैं । क्यों की पुरस्कार उस आमुख व्यक्ति की मेहनत और लगन का एक परिणाम होता है।
पुरस्कार कांसे ,पीतल; लौह; लकडी किसी का भी हो पर सम्मान होता है। इसे लौटना न सिर्फ पुरस्कार गौरव का अपमान है। बल्कि समस्त देश के पुरस्कार बितरण प्रणाली के साथ साथ देश की प्रतिष्ठा का अपमान है। पुरस्कार दान कर के समाज कल्याण किया जा सकता है । पर उसे ठुकरा कर अपमानित करना गलत है। पुरस्कार बिरोध का हिस्सा नही अपितु राष्ट्र एकता और प्रतिष्ठा का गौरव है। हमारा मूल कर्त्तव्य है की हम अपने पुरस्कार की गौरव को बनये रक्खे । और इसे राजनीत का हिस्सा न होने दे --+आमोद बिंदौरी
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