हो जो सियासत प्यार में
हमदर्द हो कितने बड़े..
2212-2212-2212-22
हो जो सियासत प्यार में रब भूल जाता हूँ
हमदर्द हो कितने बड़े तब भूल जाता हूँ
उम्दा है जबतक एक हैं कोई न हो मजहब
मैं प्यार में रब सारे मजहब भूल जाता हूँ
समशीर हाथो से हटा सजदा किया मैंने
हाँ मातृभूमी के लिए सब भूल जाता हूँ
वादी हवा में मिल रहा अब अक्स है उनका
मैंख्वार मेरा मन सब सबब भूल जाता है
हाँ तू वफ़ा है जिंदगी तेरी इनायत सब
तू साँस में मेरी बसी कब भूल जाता हूँ
मौलिक /अप्रकाशित
आमोद बिंदौरी
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