एक कवित्री

सज धज के
आ पहुँची
तेजवान मुखवाली
लम्बी लम्बी लट पहने
पायल छन छन करती
हांथ भर
गुलाबी चूड़ियाँ पहने
सिल्क की साड़ी
जो सर से निरंतर
सरक सरक कंधे खोल
रही है
दाहिने हाथ से
पल्लू पकडे
मुस्कुराते
खिल खिलाते
स्टेज पर तकती
बलखाती
एक कवित्री......!!!!!!

--------आमोद बिंदौरी

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