है हरा पीपल

है हरा पीपल
बहर:- 2122-2122-2122-212

है हरा पीपल अभी जो जिंदगी है आप की
कुछ कही कुछ अनकही बातें लिखी है आप की

प्रेम की तब छांव लेने को जहा थे बैठते
वो तसब्बुर वो अदाये कीमती है आप की

लोक नजरों से बचा कर जो भिजाये थे कभी
उन गुलाबों में अभी खुसबू वही है आप की

वो दुपट्टे का झटकना वो सदाये  प्यार की
लफ्ज का ठिठकाव् न्यारा सादगी है आप की

(है पुरानी गर्त लिपटी कुछ किताबे वही)
कुछ पुरानी गर्त लिपटी उन किताबों में वही
वो गुलाबी कागची चिट्ठी छिपी है आप की

मुद्दतों से राह ज्योते आँख भर आई जो है
जो मेरी नजरें है प्यासी आशकी है आप की

मौलिक /अप्रकाशित

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