लिपटी याद
वो एक सम्बेदी सपने सी
याद .....
एक किताबी पन्ने में कुछ
लिख कर पलट गई
वो याद बस अब एक
चलचित्र मात्र है
तलवे में करक्ते
शाल्य दर्द सीईईईईइ है......
एक लम्बी साँस.....
ले
ठहराव बस महसूस करता हूँ
जब भी
वो हकीकत
सी
मेरे तन से लिपट जाती है
काश
की रिवेर्श् कर फिर
पहुचने में कामयाब हो पाता......आमोद बिंदौरी
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