वाह रे अन्धे...
वाह रे अँधा बेंच रेवड़ी
चिन्ह् चिन्ह् दीन्हों हाँथ
धर्म आज अधर्म उभारे
पीर पैगम्बर लहू बयारे
सन्यासी हैं दौलत वाले
चर्च धर्म परिवतर्न छाले
किन धर्म ग्रन्थ की देन आडम्बर
और हिंसा करने वाले
न अब शेष बची मानवता
हो गयी पूंजी वादी...
चंगुल फंस गए जनमानस
बिगड़ी मानस दारी.....
वाह रे अंधे बेच रेवड़ी
चिन्ह चिन्ह दीन्हों हाँथ......
आमोद बिन्दौरी©®
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