चलो आज रिश्ते निभा ले

चलो आज रिश्ते निभा लें
122/122/122/122

चलो आज रिश्ते बनाकर  निभालें.
खयालों को अपना नया घर बनालें.

बढ़ाओ मुलायम हथेली वो प्यारी
पिसाई हिना है इसे अब रचालें

बनो तुम जो दुल्हन ,तो दूल्हा बनू मैं
चलो साथ बैठो की, शादी मनालेँ

लगे कुछ बुरा तो ,मुझें माफ़ करना
मुहब्बत है ऐसी की, पागल बना ले

तेरी आँख भीगी, न प्यारी लगेगी
तू नजरों में मोती ,ख़ुशी के  सजा  ले

ये  रश्में रिवाजे ,ये मजहब ये  बंदिश
मिटा के सभी जद, दुनियाँ बसा ले
मौलिक/अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी®©

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