ले जाओ
2122-1212-22
शहर से आफ़ताब ले जाओ।
अपने सूखे गुलाब ले जाओ।
मत सुनाओ मुझे वही दास्ताँ।
"जिंदगी की किताब ले जाओ"।।
छोड़ तन्हा मुझे दो मेरे शहर।
मेरे आँखों से ख्वाब ले जाओ।।
मैकदों अब नही है मुझे वास्ता।
जम में डूबे शबाब ले जाओ।।
जो भी आगोश में मेरे गुजरे।
उन पलों का हिसाब ले जाओ।।
चाँद तारों भरा रहे आँगन।
हमसफ़र माहताब ले जाओ।।
चाँद तारों भरे हँसी लमहे।
और ये माहताब ले जाओ।।
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दर्द लिपटे शबाब ले जाओ।
शहर से आफ़ताब ले जाओ।।
मेरे सागिर्द बस अन्धेरेहै।
अपने सब माहताब ले जाओ।।
छोड़ दो मुझको इस तन्हाई में।
ये कटीलें गुलाब ले जाओ।।
तुम कभी साथ बैठो संग मेरे।
इश्क दर्दो हिसाब ले जाओ।।
"जिन्दगी की किताब ले जाओ"।।
बात करना नही कभी मेरी।
चाहे बदले में ख्वाब ले जाओ।।
आमोद बिन्दौरी
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