मीना कुमारी "महजबीं"
महजबीं बाई ...उर्फ़ मीना कुमारी
खूबसूरती का वो पर्याय हैं जिन्हें आज तक पूरा हिंदुस्तान भुला नही पाया।
मीना जी ने अपने फ़िल्मी व्यवसाय की सुरुआत बहुत ही कम उम्र में सुरुकि थी। उनका घर का नाम महजबीं था जो फ़िल्मी दुनिया में आते आते मीना कुमारी में बदल गया।
मीना जी अभिनय की दुनिया का वो सितारा है जो ताउम्र दर्द और कसक में जीती रहीं। सुरुआति दौर गरीबी और बाद में दर्द जैसे उनकी किस्मत थी।मीना जी अपने दर्दो गम को अपनी शायरी में बखूबी उतारा.
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता,
धज्जी-धज्जी रात मिली।
जिसका जितना आंचल था,
उतनी ही सौग़ात मिली।।
जब चाहा दिल को समझें,
हंसने की आवाज़ सुनी।
जैसे कोई कहता हो, लो
फिर तुमको अब मात मिली।।
बातें कैसी ? घातें क्या ?
चलते रहना आठ पहर।
दिल-सा साथी जब पाया,
बेचैनी भी साथ मिली।।...मीना जी की कलम से...आलेख् आमोद बिन्दौरी
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