तुम विवाहित हुए हम कुंवारे रहे

212-212-212-212

तुम बिवाहित हुए हम कुँवारे रहे। ।
जिंदगी भर सनम बेसहारे रहे।।

चाँद आता रहा और मुकरता रहा।
तीरगी ने मेरे घर संवारे रहे।।

इन चिरागों से करता गिला भी तो क्या।
यार दुश्मन मेरे जब सितारे रहे।।

दौरे मजहब भी रोड़ा लगाता रहा।
धर्म रीत ओ रिवाजों से हारे रहे।।

इक कसक ले यही जिंदगी भर युँ ही।
लम्हा लम्हा सफ़र को गुजारे रहे।।

सर परस्ती रही साथ तन्हाई की।
इन झरोखो में बहते से धारे रहे। ।
आमोद बिन्दौरी

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