क्या यही अंत है
भावनाओं के साथ
क्यों बह जाती है
जिंदगी..........
क्यों करती है
मुहब्बत....
और
फिर पवित्र मन्दिर में
जघन्य अपराध...
आत्म हत्या....
क्यों एक एक
बून्द सी जिंदगी
तोड़ देती है
कुटुंब से नाता...
क्यों एक ठोकर
तबाह कर देती है
जीवन की सभी
लड़ियाँ......
क्या मुहब्बत
स्नेह....
लगाव....का
यही अंत है......आमोद बिन्दौरी
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