अतीत
विश्वास की वो पावन डोर
जिसका एक छोर मैं
एक छोर आप के हाथ था
उस दिन टूट गयी
जब ....आपने अपना "अतीत" कह दिया
अतीत जीवन का एक अभिन्नं अंग है
जो व्यक्ति का भविष्य निर्धारण करता है ।
अतीत वो सामर्थ है जो भविस्य की नींव रखता है
अतीत वो आग है जो भविष्य को जला कर ख़ाक भी करता है ।
अतीत हाँ मैं वही अतीत हूँ ।
मुस्कुराकर जिस पायदान को रौंदते लोग
अपने आशियाँ में जाते है ।
वो दरवाजे पर रख्खा अतीत है ।
सुबह एक आसरा लेकर लोग जब जलते दिये की लौ को बुझाते हैं
वो आप की आश का अतीत है ।
मैं वजूद हूँ एक हिस्से का .
जो पेड़ की जड़ है ....
जो सागर का का उद्गम है...
अमोद
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