रौशनाई प्यार की मिटती नहीं पर
मेरे लहजे में सिमट कर प्यार कर लो।
तुम जरा सा ही मेरा एतबार कर लो।।
मैं मुसलसल जल सकूँ इतनी मुहब्बत।
का दिया दर पर मेरी गुलज़ार कर लो।
यूँ निगाहों से जरा कह कर तुम्हारी।
तीरे उलफ़त मेरे दिल के पार कर लो ।।
मैं बिरह का गीत गाना छोड़ दूँगा।
प्रेम की बगिया में यदि बौछार कर लो।।
गर शिला रज धू से पावन हो सकेगी।
राम बन जाओ मुझे स्वीकार कर लो।।
गर तुम्हे फिर भी अधूरा लग रहा हूँ।
साथ बैठो बैठ कर श्रृंगार कर लो।।
रौशनाई प्यार की मिटती नही पर।
है तजुर्बा तो तुम्ही उपचार कर लो।।
आमोद बिन्दौरी/मौलिक
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