सियासत में कुछ भी हो सकता है

समसामयिक घटना पर आधारित ...(ये एक तर्क है -सियासत में कुछ भी हो सकता है )
time 10:10pm_27 /02/2018

तिवारी और अब्बास दो गांव के प्रमुख हैं । तिवारी ने अब्बास से कहा कुछ करो यार जिससे इस बार भी गाव का प्रधान मैं ही बनू । अब्बास ने अपने पालतू कुत्तों के द्वारा  तिवारी के गाँव के कुछ लोगों को मार दिया ।
अगले दिन तिवारी कुछ लोगों को लेकर अब्बास के गांव के किनारे गए और चिल्ला कर कहे ..उन कुत्तो को मेरे हवाले कर दो । वरना अंजाम बुरा होगा ।आस पास के गाँव के लोग भी देखे की अब्बास के कुत्तो ने तिवारी के गाँव में फजीहत की है । वो भी तिवारी के समर्थन में आ गए ।
एक दिन तिवारी ने रात में अब्बास के गांव में अपने कुछ लोग भेजे और वहां पे कुछ कुत्तो को मार दिया ।
गाव में तिवारी तिवारी तिवारी होने लगा
अब्बास ने अगले दिन बयान जारी किया ..तिवारी तुम्हारे आदमी बिन बताए हमारे गाँव में आए और ये गैर कानूनी है । हम इसका बदला तुमसे लेंगे ..
अगले दिन अब्ब्बस के कुछ आदमी ...दिन में तिवारी के गांव में घुस गए
तिवारी के आदमियों ने उन्हें रोका तो वो भागलिये ..इस झड़प में कुछ लाठियां टूट गई , एक दो आदमी और मरे एक दो गिरफ़्तारी हुई ..
जिन्हें इतिहास स्वर्ण अक्षरों से याद करेगा क्यों की उन्होंने अपने गाँव के लिए ..अब्बास के गांव में अब्बास की जय जय कार हुई

इस सारी कहानी में तिवारी, और अब्बास दोनों का फायदा हुआ ।
तिवारी ...अब अपने गांव के प्रधान चुने जाएंगे
और अब्बास भी अपने गाँव के प्रधान बने रहेंगे

आस पास के गाँव दबाव बनायेगे ...अबे रोज रोज को चिक चिक बंद करो
शांति समझौता कर लो ...
जो कल होगा ...

आमोद बिंदौरी ®©

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