ख़ुशी ..मां है ..तो हँसी पत्नी है ..
ख़ुशी...माँ है ..तो हँसी पत्नी है ...
हँसी ...का स्वभाव पत्नी की तरह है
जबकि ख़ुशी स्वभाव से ...माँ की तरह है
हँसी ..के साइड इफेक्ट हैं
..यथा उचित स्थान में नहीं आई तो
प्रॉब्लम खड़ी करती है ।
जबकि ...ख़ुशी ..अंतः करण में एक ऊर्जा है
जो भावनाओ में मातृत्व, स्नेह,दया, को जन्म देती है ।
हँसी ...दुश्मन के सामने आई तो
...जानलेवा हो सकती है ।
ये समाज में आप की प्रतिष्ठा को गिरा भी सकती है
और उठा भी सकती है । यह उपहास का कारण भी है ।
ये एक व्यक्ति विशेष के लिए भले लाभदायक हो ..
पर उसी दौरान किसी को दुखी भी कर रही होती है ।
जबकि ख़ुशी ...किसी भी तरह से ...
दुःखद नहीं होती ..
हलाकि ये दुःख में मलहम का काम करती है ।
और दुनिया में सबसे सुकून की जगह
अगर कोई है तो वो माँ की गोद ही है ...
इसलिए ....ख़ुशी को माँ
और हँसी को ..पत्नी का दर्जा ...
मैं अपनी जिंदगी में देता हूँ ..
आमोद बिंदौरी
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