कोई तो दीद के काबिल है आया

1222-1222-122

श'हर  में शोर ये  फैला हुआ है ।।
पडोसी गाँव में मुजरा हुआ है।।

कोई तो दीद के क़ाबिल  है आया ।
यहाँ दो दिन से ही परदा हुआ है।।

वतन की आबरू कैसे बचाए।
म'सलतन आज ही सौदा हुआ है।।

जरा देखूं सराफ़त छोड़ कर के ।
सुना है नाम कुछ अच्छा हुआ है।।

अजां पढ़ ले या बुत की आरती को ।
सभी कुछ आज कल धंधा हुआ है।।

हमारे देश की हालत बुरी अब।
बुलंदी खोर हर तबक़ा हुआ है ।।

गले को फाड़ कर चीघे भी कितना ।
जमाना दूर तक बहरा हुआ है ।।

कई हिन्दू ओ मुस्लिम घर  जले हैं।
ये दंगा किसका' अब भेजा हुआ है।।

किसी को कुछ न कहना ठीक है जी ।
सियासी शख़्स तो नंगा हुआ है।।

म'सअले देर तक ना फडफ़ड़ाएं।
विपक्षी संग समझौता हुआ है ।।

हुई जब से मुहब्बत दिल का मेरे।
ऐरा गैरा नत्थू खैरा हुआ है।।

आमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित

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