वो अपने गम छिपा कर मुस्कुराए
1222-1222-122
वो अपने गम छिपाकर मुस्कुराए ।।
वो....जो शादीशुदा पर मुस्कुराए।।
जमाना चाहता तो बस यही है ।
की हम टूटें वो हमपर मुस्कुराए।।
यकीं मानो है खुशकिस्मत वो चूल्हा ।
धधकती लौ जो सहकर मुस्कुराए।।
जो खुद तपता है घर की छत की तरहा।
उसी की छांव में घर मुस्कुराए।।
मिली जिनको सुख़न छालों की यारों ।
वही पथ आगे चलकर मुस्कुराए।।
मेरा खुद का तजुरबा कह रहा है ।
पिता मुझको ही पाकर मुस्कुराए।।
मेरी कीमत भले कौड़ी न हो पर।
माँ आँचल में छिपाकर मुस्कुराए।।
आमोद बिन्दौरी/ मौलिक अप्रकाशित
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