बात करते हैं मुंह–फुला मुझसे


2122/1212/22

घर की रोटी ओ जाइका मुझसे ।।
बात करते हैं मुंह–फुला मुझसे।।

मेरी नजरों से कट के रहता है।
दिल भी’ रूठा हुआ हुआ मुझसे।।

दूर तक देखिये दिखावा अब।
रंग कितने हैं राबता मुझसे।।

ठोकरें सिर्फ दिल को’ देता है।
इतना’ वाकिफ है रास्ता मुझसे।।

इक भटकता हुआ मुसाफ़िर मैं!
पूछिए गर मेरा पता मुझसे ।।

दो को’ई खत कहीं से लाए गर!
पूछते क्या हो डाकिया मुझसे ?

खेत खलिहान और पगडंडी।
जानिएगा भी’ और क्या मुझसे।

एक मुफलिश हूं रोज हारा हूं ।
चाहते क्या हो मशवरा मुझसे ।।

फोन नंबर वही है’ जो कल था।
बात करिएगा’ शाहिबा मुझसे ।।

आमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित

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