अब क्या करें की ..

अब क्या करें, की न आई
 हमें मुहब्बतें करनी
ये बस यूं था की 
पसीने में छिड़कनी थी
 कुछ बूंदें इश्क ए इत्र की ।
सफर में बेहोश था 
या मदमस्त इसे कौन जाने
किसे होश था की बांकी है 
अभी मोहब्बतें करनी
एक असासा रहा, चलता साथ–साथ
और कुछ यूं की ,मिन्नत ए गर्दिश ए हालात रहे 
कभी घुटनों पे ला दिया कभी उंगलियां पकड़ी 
कभी थप्पड़ जड़ रूला दिए जाते रहे ....
आंखों ने ख्वाबों में मखमली बिस्तर नही देखे 
और प्यासों में, कभी जमजम नहीं सोचा 
जो मिला, रहमत उसकी माना किए
जो नही मिला, किस्मत समझ लिए
इक उम्र थी उमंग थी हुस्न ए अय्यारी भी थी...
रास्ते में चलते गिरते थे फूल कदमों में उनके...
एक वक्त तक सब एक जैसा ही रहा 
और एक वक्त ये है के ..........
बस चाहता हूं की सांसे शालीन रहें 
अब न मचले, न उलझे, न उखड़े आमोद
ये आंखें खुली रहें तो भी नम रहें
आमोद बिन्दौरी

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जीवन पथ पर संशय गढ़कर ,स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए

अपने दुख को स्वयं निमंत्रण देता हूं

तब मानूंगा ....प्रेम है तुमसे