असम ...31/12/2022

मुझे यहां आए हुए आज से 43 दिन हो गए हैं । आज सन 2022 का अंतिम दिन है । कल से नए वर्ष 2023 का सूर्य haflong,दीमा हसाओ , असम के पहाड़ों से उदय होता हुआ देखूंगा । मैं कंस्ट्रक्शन कंपनी का एक छोटा सा इंप्लोई ( एम्प्लॉय) हूं।हम यहां पर NH 54 का निर्माण कार्य कर रहे हैं । भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के आने से मार्ग बहुत खराब है । कहीं कहीं तो है ही नही.. हमारे साथ देश के कोने कोने के लोग एक साथ काम करते हैं। जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार, बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश , उत्तराखण्ड, उड़ीसा, राज्यों से आए हुए सदस्य है। सभी की भाषाएं, रहन सहन, खानपान अलग अलग है। इस तरह तो आप समझ गए होंगे की भोजनालय वाले की जवाबदारी कितनी जटिल है। खैर इसमें कोई दो राय नहीं है वो काफी हद तक अच्छा खाना बनाने का प्रयास करता है । 
हाफलोग के पास से एक नदी निकलती है । जिसको जतिंगा रीवर कहते हैं। जतिंगा रीवर में पहाड़ों से झरते हुए छोटे छोटे झरने घाटियों से आते हुए मिलते हैं ।इसी में एक जगह कपुरचेरा ( गांव का नाम )के आस पास है ।उस घाटी से जब भी गुजरता हूं। तो काफी अच्छा feel आता है। अगर मेरे पास पक्षियों की तरह पंख होते तो मैं उड़ते हुए इस घाटी का नजारा जरूर देखा पता । फिर भी आंखो से जो देख पता हूं वो काफी अलग है ।मैं गूगल अर्थ के 3D में भी उस लुभावने दृश्य को देखता हूं।और आनंदित होता हूं ।ये बिलकुल वैसा है जैसे आप ड्रोन से घाटियों और पहाड़ों की सैर पर निकले हो । घाटी से आने वाली हवा तरोताजा करती है। और झरने का पानी साफ स्वादिष्ट है ।अगर हवा का रुख घाटी से नीचे ओर हुआ तो पक्षियों का कोलाहल साफ सुनाई देता है । यहां पशु और पक्षियों की ढेरी नश्ले हैं। बहुत सी ऐसी है जो आज तक मैंने देखी भी नहीं थी । हिरण, जंगली भालू, नील गाय ( यहां अलग नस्ल की है ) पक्षियों के नाम बता पाने में असमर्थ हूं । सुपाड़ी के सुंदर से पेड़, केला ( हालांकि केला यहां पर एक तरह की गाली है । इसलिए banana बोलना ज्यादा अच्छा है ), संतरा ( कई तरह के ) अनानास, पपीता, हरे रंग की लौकी, कद्दू, एक अलग तरह की पहाड़ी धनिया पत्ती ( देखने में गोभी पत्ते जैसी दिखती है ) , लाल त्वचा की मूली( अंदर मूली की तरह ही सफेद हैं) , बांस भी सब्जी के रूप में प्रयोग होता है। 
लेकिन यहां का मुख्य भोजन मांस आहार है ।इसलिए ज्यादा खुश होने जैसी कोई बात नही है ।
 यहां करीब 10 भाषाएं ( हिंदी, नेपाली, बंग्ला,आसामी, दीमासा,आदिवासी,बोरो,नागालैंड की भाषा, मंडरी ( चाइना की भाषा) बोली जाती है। अब आप समझ सकते हैं की भाषाओं की खिचड़ी कितनी प्यारी होगी । 
कभी कभी एक बात समझाने में मिनटों का समय लगता है। और कहीं अर्थ का अनर्थ हो गया तो अलग ही आफत है ।मैं तो कई राज्यों में कार्य कर चुका हूं ।मुझे अटपटा तो नहीं लगता लेकिन हां परेशानी जरूर होती है। कभी कभी सामने वाले की बात समझने में भी देर लगती है । इसका एक फायदा भी है। किसी को मुस्कुराते हुए चेहरे से खड़ी बोली ( बुंदेलखंड की भाषा)में गाली भी दे सकते हैं। लेकिन शर्त ये है वो हिंदी न जानता हो ।😂 मैं मजाक कर रहा हूं । ऐसा नहीं करता हूं। 
शांत मन से खाली समय में मैं बहुत बारीक नजरों से सब को समेटने का प्रयास करता हूं ये काफी अलग अनुभव है । @आमोद बिंदौरी

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